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इंदिरा गांधी पाकिस्तान को परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनने से रोक सकती थी, पर ऐसा नही किया ..जानिए क्यों?

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भारत और पाकिस्तान दोनो आपस में चिर प्रतिद्वंदी रहे है,पिछले 7 दशकों में दोनो देशो के बीच 3 प्रमुख युद्ध हुए व सीमापार गोलाबारी तो अब रोजमर्रा का काम हो चुका है। इतना ही नही दोनों देश परमाणु शक्ति सम्पन्न है और दक्षिण एशिया को पूरी तरह से तबाह कर देने की ताकत भी रखते है।

बहुत से लोग एक सवाल जरूर पूछते है कि भारत की पिछली सरकारों ने क्यों पाकिस्तान जैसे नीच राष्ट्र को परमाणु शक्ति प्राप्त करने की अनुमति दी? क्या पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म अतीत में खत्म किया जा सकता था? हाँ बिलकुल किया जा सकता था ..आइये जरा बारीकी से जानते है।

हाल ही में यूनाइटेड स्टेट डिपार्टमेंट ने अपने शीर्ष गुप्त दस्तावेजो के बारे में बताया जो 1984-85 के पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम पर आधारित है। इन दस्तावेजों में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन द्वारा पाकिस्तानी राष्ट्रपति को लिखे गए एक पत्र के अनुसार “अमेरिका ने पाकिस्तान को कूहटा में पाकिस्तानी परमाणु संयंत्र पर  सम्भावित सैन्य कार्यवाई की चेतावनी दी थी” इस दौरान सिर्फ अमेरिका ही सुपर पावर नही थे जिसने खतरे के अलार्म को बजाया था उसके अलावा सोवियत रूस जो इस नाभिकीय विकास के बारे जागरूक उसने भी इस पर आपत्ति दर्ज की थी।

इन दस्तावेजो के आधार पर रदचेंको कहते है हंगरी के अभिलेखागारों के दस्तावेजो से पता चलता है कि हंगरी भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान के कूहटा संयंत्र पर हमले की प्लानिंग का पता रूस को भी था।

“ये अत्यंत गोपनीय दस्तावेज अनेको रहस्य अपने अंदर समाये हुए है ..इनके अनुसार भारतीय सैन्य सलाहकारों ने मार्च 1982 में इंदिरा गांधी को इस हमले का प्रस्ताव दिया था पर बाद में इंदिरा गांधी उसे खारिज और विफल कर दिया था”

हालांकि भारत और पाकिस्तान के  परमाणु संयंत्रों के गैर हमलों के समझौते पर 1985 में मौखिक तौर पर एक सहमति बनी और औपचारिक रूप से 1988 में  इनपर हस्ताक्षर हुए और 1991 में इसकी पुष्टि की गयी। 1992 से भारत पाकिस्तान प्रतिवर्ष 1 जनवरी को अपने नाभिकीय संयंत्रों की जानकारी एक दूसरे से साझा करते आ रहे है।

भारत का कूहटा संयंत्र पर हमले का प्लान

ये जानना दिलचस्प होगा की 1980 के दशक में भारत पाकिस्तानी कूहटा संयंत्र पर हमले के कितना नज़दीक था ।  भारत को इसकी प्रेरणा इजराइल द्वारा इराक़ के ओसिराक में एक निर्माणाधीन परमाणु संयंत्र पर किये हमले से मिली। जिसमे इजराइल की वायु सेना ने  8 F-16 लड़ाकू विमानों से 3 दुश्मन देशो की वायु सीमा को पार कर करीब 600 किलोमीटर की उड़ान भर कर एक सफल हमला किया ।

ये हमला विश्व के अबतक का सबसे खतरनाक और वीरतापरक सैन्य अभियानों (Sergical Strike) में से एक माना जाता है और इसी तर्ज पर भारत सेना भी पाकिस्तान पर भारी बमबारी करने की योजना बना रही थी।

इन दस्तावेजो के अनुसार उन दिनों जब भारतीय वायु सेना में जगुआर लड़ाकू विमान शामिल किये तब वायु सेना ने इस तरह की सर्ज़िकल स्ट्राइक की व्यूह रचना व् अन्य जानकारी प्राप्त करने के लिए एक संक्षिप्त अध्ययन किया था। इन अध्ययनो के अनुसार भारत पाकिस्तान के कूहटा संयंत्र पर जबरदस्त हमला कर उसे पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम था और भारतीय सेना इस हमले के लिए पूर्ण आत्मविश्वास में आ चुकी थी।

रीढ़विहीन राजनैतिक नेतृत्व

लेकिन जैसा हम जानते है कि राजनैतिक नेतृत्व ऐसे किसी भी मिलिट्री ऑपरेशन का पक्षधर नही था ,नेताओ को डर था कि इस तरह के हमलों से दोनों देशों बीच एक बहुत बड़ा युद्ध छिड़ सकता है क्योंकि ये हमला पाकिस्तान को प्रतिशोध के लिए उकसा सकता है और हो सकता है जैसा हमला हम करेंगे प्रतिउत्तर में पाकिस्तानी सेना भी वैसा ही हमला हमारे संयंत्रों पर भी कर सकती है।

इन दस्तावेजो के अनुसार भारतीय सेना के अधिकारियों ने  इज़राइल से गुप्त रूप से युद्ध में प्रयोग होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीददारी
के लिए फरवरी 1983 में इज़राइल की यात्रा भी की जिनका इस्तेमाल कूहटा हमले में पाकिस्तान की एयर डिफेंस को नेस्तेनाबूद करने में  किया जाना था ।

इज़राइल ने भारत को F16 का तकनीकी विवरण इस शर्त पर दिया की भारत इज़राइल को MIG-23 की तकनीकी जानकारी देगा। 1983 के दौरान भारतीय रणनीतिक मामलो के जानकार भारत कर्नाड के अनुसार इंदिरा गांधी ने फिर से कूहटा पर एयर स्ट्राइक की रणनीति बनाने को कहा।
पर … पाकिस्तानी परमाणु वैज्ञानिक मुनीर अहमद खान
विएना में भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग प्रमुख राजा रमन्ना से मिले और ट्राम्बे स्थित भाभा एटॉमिक रिसर्च पर हमला करने की धमकी दी यदि भारत ने पाकिस्तान पर कोई हमला किया।

सितम्बर-अक्टूबर 1984 ,माना जाता है भारत ने कूहटा हमले पर गम्भीरता से विचार किया था,इस बीच पूरे विश्व को पता चल चुका था पाकिस्तान परमाणु रिसर्च की आड़ में आयुध निर्माण कर रहा था और परमाणु हथियार संवर्धन पार कर चुका था।

धोखेबाज़ अमेरिका : तत्कालीन अमेरिकी राजदूत डीन हिंटोंन ने जिया को बताया कि यदि अमेरिका ने ऐसे कोई साक्ष्य देखे जिसमे भारत पाकिस्तान पर कोई हमला करता या तैयारी करता है तो हाथों हाथ हम ये जानकारी पाकिस्तान को बता देंगे।

22 सितम्बर । एक विदेशी और विश्वसनीय स्रोत के अनुसार -माना जाता है की CIA के उप निदेशक ने पाकिस्तान के आला सैन्य अधिकारियों को भारतीय वायु सेना की ऐसे गतिविधियों की जानकारी दी और हमले की सम्भावना की आशंका व्यक्त की तथा ABC टेलीविज़न ने भी बुलेटिन जारी कर कहा था को हो सकता है भारत पाकिस्तानी नाभिकीय संयंत्र पर हमला कर दे जो की CIA द्वारा तैयार की गयी व् अमेरिकी खुफिया सीनेट को भेजी गयी रिपोर्ट पर आधारित था।

अब जब भारतीय सेना की इस अत्यंत खुफिया जानकारी के पूरी दुनिया के सामने उजागर हो चुकी थी सेना ने इस हमले की प्लानिंग को लेकर ऊहापोह में थी क्योंकि ये एक प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गयी था।

अफवाह ये थी की इज़राइल सेना भी इस हमले में शामिल होने जा रही थी जिसका उद्देश्य एक “एक इस्लामिक बम” को विकसित होने देना नही था बल्कि ये बम उनके स्वयं के अस्तित्व के लिए खतरा साबित हो सकता था जिससे पाकिस्तान को ऐसी स्थिति में जाने से रोकना था..भारत चाहता था कि इज़राइल इस हमले की अगुवाई करे और भारतीय वायु सेना को सलाह देने की भूमिका निभाएं।

कमजोर थी इंदिरा गांधी  : इंदिरा गांधी ने किसी भी प्रकार की अमेरिकी कार्यवाई से बचने के लिए इस मास्टर प्लान को वीटो पालिसी के तहत लाते हुए निरस्त करवा दिया था ।

अगर इंदिरा को सच में “आयरन लेडी” माना जाता है तो उन्होंने भारतीय सेना और इज़राइली सेना के साथ मिलकर पाकिस्तानी परमाणु संयंत्र पर हमले की कार्यवाई का श्री गणेश क्यों नही किया… वो क्यों पीछे हट गई क्या उसे अमेरिका का डर सता रहा था या कुछ और..??

आज इस परमाणु शक्ति सम्पन्न पड़ोसी के कारण भारत को अपने अस्तित्व की लड़ाई को जारी रखने के लिए कड़े प्रयास करने पड़ रहे है।

तो ऐसे थे हमारे कांग्रेसी गांधी परिवार के नेता |

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