Home International इस शीत युद्ध में अमेरिका को तगड़ी टक्कर देगा रूस का s-400

इस शीत युद्ध में अमेरिका को तगड़ी टक्कर देगा रूस का s-400

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यदि यूरोप रूस के साथ युद्ध की घोषणा करता है तो इस स्थिति में अमेरिका और नाटो सेनाये को हफ्तों तक हवाई सहायता नहीं मिल पाएगी,इन सेनाओं को अपनी थलसेना पर ही निर्भर रहना होगा उसका बड़ा कारण ये होगा की रूस का अत्याधुनिक एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम यूरोपीय वायुक्षेत्र को नाटो सेनाओं के लडाकू विमानों के लिए अपारगम्य बना देगा | अमेरिकी सैन्य अधिकारियों व् विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी सेना को अपने आर्टिलरी सेना को अपग्रेड करना चाहिए जिससे की वो युद्ध जैसी स्थिति में रूस की आक्रामक और अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली का मुकाबला कर सके |

पिछले दशको में रूस ने अपनी रक्षा प्रणाली को सुद्रढ़ व् बेहद सम्वेदनशील बनाया है जिसका सबसे घातक हथियार S-400 triumph मिसाइल सिस्टम है जिसने दुनिया भर में अपना लोहा मनवा लिया है | प्रत्येक S-400 बैटरी में 4 मिसाइल होती है और सभी को विभिन्न रेंज के लिए डिजाईन किया जाता है जो 250 किलोमीटर की दूरी तक और 98,000 फीट की ऊंचाई तक एकदम सटीक व् त्रुटी रहित निशाना लगाने में सक्षम होती है,इनकी स्पीड 15 MACH (11,509 मील/घंटा) तक मापी गयी है जो की इस हथियार को इस श्रेणी सर्वोच्च बना देती है |

युद्ध की स्थिति में अमेरिकी वायुसेना के विमान पूर्वी यूरोप में रूस के समक्ष एक बड़ा खतरा मोल ले सकते है क्योंकि  S-400 की रेंज और मारक क्षमता अमेरिकी और नाटो सेनाओं को सीमित क्षेत्र में ही खुफिया कार्यवाई के लिए मजबूर कर देगा |रॉन कॉर्प के एक वरिष्ठ नीति शोधकर्ता जॉन गॉर्डन IV ने निष्कर्ष निकाला कि संभावित संघर्ष के पहले सात से 10 दिनों में रूस सभी प्रकार की जमीनी लड़ाई में अपने हथियारों के दमबाजी मार ले जाएगा | इस स्थिति में अमेरिका को अपनी तोपखाना अर्थात आर्टिलरी हथियारों की क्षमता को बढाना होगा जिससे S-400 की घातक मार को कुछ प्रतिशत रोका जा सकेगा और अमेरिकन सेना को इसका लाभ भी मिलेगा | गोर्डन के अनुसार अमेरिका और नाटो सेनाओं को अपनी आर्टिलरी सेना पर ध्यान देना होगा क्योंकि रूस जार के समय से ही आर्टिलरी क्षमता में अग्रणी रहा है , रूस को कई अलग-अलग क्षेत्रोंविशेष रूप से तोपों में बढत मिली हुयी है | अमेरिकन तोपों की तुलना में रूसी तोपे 50-100 प्रतिशत अधिक उन्नत पायी गयी है जो की एक गम्भीर मसला है | यह बेमेल सेना को अपनी तोपखाने की सीमा और परिष्कार बढ़ाने के लिए चला रहा है। सेना ने लांग-रेंज प्रेसिजन फायर (एलआरपीएफ) कार्यक्रम को अपने शीर्ष आधुनिकीकरण लक्ष्य का नाम दिया है।कमांडिंग जनरल रॉबर्ट ब्राउन ने संगोष्ठी से कहा, “हमें निकट, गहरी और रणनीतिक विकास के लिए सभी प्रणालियों कीअधिकतम सीमा को आगे बढ़ाने के लिए अवसर और सरकार का सहयोग मिल गया है,और हमें दुश्मन से आगे निकलना होगा।

हम अभी ऐसा नहीं करते हैं; यह एक बड़ा अंतर रह जाएगा ,हमे ऐसी तोपों की जरूरत है जो रणक्षेत्र में राकेट का प्रक्षेपण भी कर पाए ,हमे ऐसे राकेट चाहिए जो मिसाइल की तरह दागे जा सके जिनकी रेंज 499 किलोमीटर तक हो | LCRF प्रोजेक्ट का मुख्य ध्येय मिसाइल सिस्टम की सटीकता होगा जिसकी रेंज 310 मील होगी और वर्तमान की आर्मी टेक्टिकल मिसाइल सिस्टम को बदलकर रख देगा , ये हथियार २०२३ तक लांच किये जायेंगे जिसमे विभिन्न प्रकार के राकेट,आर्टिलरी हथियारों व् मिसाइल सिस्टम को अपग्रेड किया जाना है| लंबी अवधि की परियोजनाओं में सेना फ्यूचरिस्टिक हाइपरवेलोसिटी  और इलेक्ट्रोमॅग्नेटिक हथियारों की व्यवहार्यता पर शोध कर रही

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