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क्यों बंगाल आतंकियों की पनाहगाह बन गया है?

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दक्षिण एशिया में उभरते भारत को पड़ोसी देश प्रतिस्पर्धी न समझते हुए शत्रुता पर उतर आये है । खासकर पाकिस्तान की तरफ से हमे आतंकी घुसपैठ के साथ LOC पर अकारण फायरिंग और देश के अन्य हिस्सों में उठा पठक में पाकिस्तान के शामिल होने की संभावना  ने भारत को एक नए सिरे से सोचने के बाध्य किया है जिसका भारत ने कठोरता से पालन भी किया है और आतंक को पीछे हटने पर मजबूर भी किया है ।

लेकिन पिछले सालो में हुए आतंकी हमलों,घुसपैठ और अवैध फंडिंग से देश की स्थिति ऐसी हो चली जिसमे जिसमे एक ऐसा वर्ग उभर कर सामने आया जो आतंकी संगठनों के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहा है जो आतंकियों को देश में घुसने और उनके मिशन पूरे करने में सहायक रहा है ..

जी हाँ हम पश्चिम बंगाल की बात कर रहे है ..दशकों से बंगाल आतंक का गढ़ बना हुआ है । समुद्री रास्तो,बांग्लादेश से नजदीकी और मुस्लिम बहुल होने के कारण दुश्मनों को फलने फूलने का उचित माहौल मिला और उसका प्रबल पोषण सरकार की उदासीन नीतियों और अनदेखियो ने किया । हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में आतंकी गतिविधियों को देखते हुए भारत के लिए भयावह स्थिति की विवेचना की है ।

भारतीय केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजे गए बांग्लादेश सरकार की एक रिपोर्ट की यह पुष्टि की गई है कि बंगाल, असम और त्रिपुरा के साथ, एक जटिल आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा है, जहां बांग्लादेश और म्यांमार आधारित मॉड्यूल भारत में इन हिस्सो से सुगम्य प्रवेश के कारण सुरक्षित आश्रयों स्थल बन जाता है – बांग्लादेश की सीमा और अन्य कारण स्थानीय सरकार की निरंतर अज्ञानता और अनदेखी के कारण ये क्षेत्र आतंकवाद और देशद्रोही गतिविधियों का प्रजनन स्थल बन गया है ।

पश्चिम बंगाल  बांग्लादेश के साथ 2200 किलोमीटर की सीमा से जुड़ा हुआ है, और हरकत-उल-जिहादी अल-इस्लामी (हुजी) और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमएम) जैसे बांग्लादेशी आतंकी संगठनों के हमलों के लिए सबसे उपयुक्त मार्ग है .. अवैध घुसपैठ और वोट बैंक की राजनीति चुपके से पश्चिम बंगाल की जनसांख्यिकी उन्हें पुनर्वास और सुरक्षा भी प्रदान करती है।आतंकियों के ग्राउंड वर्कर व् स्वयं आतंकवादी कोलकाता की कनेक्टिविटी का उपयोग करते हुए हथियार और गोला-बारूद के साथ पश्चिम बंगाल राज्य में घुसपैठ कर रहे हैं और भारत के विभिन्न हिस्सों में फैल रहे हैं। एक खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक साल पहले की तुलना में 2016 में आतंकवादी घुसपैठ में तीन गुना बढ़ोतरी हुई थी। लगभग 2,010 हूजी और जेएमबी के लोग तीनों राज्यों के माध्यम से प्रवेश करते है  अखबार की रिपोर्ट कहती है कि लगभग 720 घुसपैठिये बंगाल सीमा से सीधा प्रवेश करते है जिनपर कोई रोकटोक नही है।

बंगाल सरकार इन रिपोर्टो को सन्देहास्पद मानती आयी है परन्तु डराने वाले तथ्य ये है कि वर्ष 2014-15 में  होने वाली घुसपैठों की संख्या 800 व् 659 रही है । अक्टूबर 2014 में हुए बर्दमान विस्फोट और 2 JMB के आतंकियों के बीच सीधा सम्बन्ध NIA के जांच में सामने आया जिस।इ पुलिस ने मोबाइल सिम,घड़िया और मोबिके फ़ोन बरामद किये थे ।

इतने सबूत होने के बावजूद ममता सरकार इन तथ्यों को मानने से इंकार करती आ रही है और इन गतिविधियों पर अंकुश कसने की बजाय वो सुरक्षा एजेंसियों को ही सच्चाई का पता लगाने की सलाह देती आ रही है।

यह भी ज्ञात रहे कि कुख्यात ढाका गुलशन कैफे विस्फोट के आतंकवादी मास्टर बंगाल के एक होटल में रहे.. एक हमले, जिसे बाद में इस्लामी राज्य के मुखिया के रूप में स्थापित किया गया था, को बांग्लादेशी-कनाडाई इस्लामिक स्टेट ऑपरेटिव तमिम चौधरी के नेतृत्व में आतंकवादियों के एक समूह द्वारा योजनाबद्ध और निष्पादित किया गया था। यह भी पता चला है कि तामिम और जेएमबी नेता मोहम्मद सुलेमान, दोनों ही गुलशन कैफे हमले में प्रमुख खिलाड़ियों में से थे, जिसने विदेशियों सहित 29 लोगों की हत्या की थी, हमले से कुछ ही समय पहले भारत आए थे और मालदा में अबू मूसा से मिले थे। मार्च में कोलकाता पुलिस ने गिरशान कैफे हमले के एक अन्य संदिग्ध को गिरफ्तार किया। इद्रिस अली को एक विशेष टास्क फोर्स द्वारा शहर के बुर्राबाजार इलाके से गिरफ्तार किया गया, जिसने दिल्ली के विशेष सेल से छेड़छाड़ की थी।

बंगाल में अवैध आप्रवासियों की समस्या एक सुरक्षा मुद्दा है क्योंकि यह एक राजनीतिक मुद्दा भी है । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पहले से ही अपने प्रमुख मसलों में से एक बना दिया है और राज्य में अपना आधार फैलाने के लिए पर्याप्त राजनीतिक लाभ उठाया है। हाल ही में कोयंबटूर में अपनी तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक के अंत में एक प्रस्ताव पारित किया दुर्भाग्य से, राज्य सरकार भी इस मुद्दे को एक राजनीतिक फिल्टर से देखती है, सुरक्षा से संबंधित नतीजों की पूरी तरह से अनदेखी कर रही है। बांग्लादेश की रिपोर्ट ममता बनर्जी के लिए एक समय पर जागृत कॉल के रूप में आनी चाहिए। वह राष्ट्रीय हित में पक्षपातपूर्ण राजनीति से ऊपर उठने की जरूरत है।

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