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CPEC के जरिये कश्मीर हथियाने की कोशिश करते चीन और पाकिस्तान

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CPEC बना सरदर्द : चीन और पाकिस्तान का इकनोमिक कॉरिडोर पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने की सम्भावनाओ को देखते हुए भारत के प्रबल विरोध का अमेरिका ने समर्थन किया है .. कहा है कि ये इलाका भारत और पैकिस्तान के बीच अभी विवादित क्षेत्र है जिसपर दोनों देश अपना अधिकार लंबे समय से जताते आये है और इस मुद्दे पर इन दोनों देशों के बीच युद्ध भी लड़े गये है.. ट्रम्प प्रशासन से ये भी कहा है कि किसी भी देश को Belt & Road Initiative के जरिये जबरन अपनी बात मनवाने का अधिकार नही है … ज्ञात रहे की ये कॉरिडोर पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ेगा तथा इसके POK से गुजरने के कारण भारत सम्प्रभुता के मुद्दे पर इसका विरोध जता रहा है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने चीन के OBOR प्रोजेक्ट को असंवैधानिक करार देते हुए कड़ा विरोध करते हुए कहा कि दुनिया में कई बेल्ट्स एंड रोड्स है लेकिन किसी भी देश को OBOR को लेकर अपना हक नही जताना चाहिए और इस प्रोजेक्ट के कश्मीर जैसे अत्यंत विवादित क्षेत्र से होकर गुजरना वहाँ के हालात खराब कर सकता है क्यों की हमे आशंका है इसके जरिए वहाँ तानाशाही करने की कोशिश की जा रही है।

चीन से पाकिस्तान के बीच OBOR प्रोजेक्ट की लंबाई 3,000 किलोमीटर है जो चीनी राष्ट्रपति का पसंदीदा प्लान है .. अन्य OBOR प्रोजेक्ट्स के जरिये चीन यूरोप के साथ साथ अन्य पडोसी देशो को भी जोड़ेगा जिसके अंतर्गत कई बन्दरगाह भी होंगे।

एक रूट बीजिंग को तुर्की तक जोड़ने के लिए प्रपोज्ड है। यह इकोनॉमिक रूट सड़कों के जरिए गुजरेगा और रूस-ईरान-इराक को कवर करेगा।

– दूसरा रूट साउथ चाइना सी के जरिए इंडोनेशिया, बंगाल की खाड़ी, श्रीलंका, भारत, पाकिस्तान, ओमान के रास्ते इराक तक जाएगा।
– पाक से बन रहे CPEC को इसी का हिस्सा माना जा सकता है। फिलहाल, 46 बिलियन डॉलर के चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर काम चल रहा है। बांग्लादेश, चीन, भारत और म्यांमार के साथ एक कॉरिडोर (BCIM) का भी प्लान है।

– CPEC के तहत पाक के ग्वादर पोर्ट को चीन के शिनजियांग को जोड़ा जा रहा है। इसमें रोड, रेलवे, पावर प्लान्ट्स समेत कई इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट किए जाएंगे।

– CPEC को लेकर भारत विरोध करता रहा है। हमारा दावा है कि कॉरिडोर पाक के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से गुजरेगा, तो इससे सुरक्षा जैसे मसलों पर असर पड़ेगा।

OBOR समिट में शामिल नहीं हुआ था भारत
– 13-14 मई को बीजिंग में हुई OBOR समिट में भारत शामिल नहीं हुआ था। चीन ने भारत को शामिल होने के लिए न्योता भेजा था।

– भारत ने कहा था, “हम क्षेत्र में कनेक्टिविटी को लेकर जोर देते रहे हैं लेकिन OBOR में पाकिस्तान की तरफ से समस्या रही है। इसकी वजह ये है कि OBOR का हिस्सा माना जाने वाला चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पीओके से होकर गुजरेगा।”
– भारत ने समिट शामिल न होने की वजह कश्मीर और सॉवेरीनटी (संप्रभुता) को बताया था। इसमें दुनियाभर के 29 देश शामिल हुए थे।

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