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कश्मीर के आतंकवादियों में मचा हाहाकार, क्यूकी अब उन्हें कुचलने आ रहे हैं “गरुड़”

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भारतीय वायु सेना की सबसे खतरनाक इकाई माने जाने वाले गरुड़ कमांडो अब कश्मीर में आतंकवादियों का खात्मा करेंगे। गरुड़ कमांडोज ने ही बीते साल पंजाब के पठानकोट स्थित वायुसेना स्टेशन में हुए आतंकवादी हमले में आतंकवादियों को मार गिराया था। गरुड़ कमांडो भारतीय वायुसेना के ही नहीं बल्कि भारतीय सेना के सभी अंगों के सबसे खतरनाक लड़ाकुओं में से एक माने जाते हैं।

-भारतीय वायु सेना के लिए स्पेशल फोर्स की जरूरत तब महसूस की गई, जब 2001 में आतंकियों ने जम्मू और कश्मीर में 2 एयर बेसों पर हमला किया।

-गरुड़ कमांडोज की ट्रेनिंग नेवी के मार्कोस और आर्मी के पैरा कमांडोज की तर्ज पर ही होती है। इन्हें एयरबॉर्न ऑपरेशंस, एयरफील्ड सीजर और काउंटर टेररेजम का जिम्मा उठाने के लिए ट्रेन किया जाता है। गरुण कमांडो जम्मू और कश्मीर में काउंटर इन्सर्जन्सी ऑपरेशंस में भी ऑपरेट कर चुके हैं। शांति के समय उनकी एक मुख्य जिम्मेदारी होती है वायुसेना की एयरफील्ड्स की सुरक्षा करना।

-आर्मी और नेवी से अलग, गरुड़ कमांडो वॉलनटिअर नहीं होते। उन्हें सीधे स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग के लिए भर्ती किया जाता है। और एक बार गार्ड फोर्स जॉइन करने के बाद कमांडो अपने पूरे करियर के लिए यूनिट के साथ रहते हैं। इस वजह से यूनिट के पास लंबे समय के लिए बेस्ट सोल्जर रहते हैं।

-गरुड़ कमांडो बनना आसान काम नहीं है। सभी रिक्रूट्स का बेसिक ट्रेनिंग कोर्स 52 हफ्तों का (इंडियन स्पेशल फोर्सेज में सबसे लंबा) होता है। शुरुआती 3 महीनों के प्रॉबेशन पीरियड में अट्रिशन रेट काफी ज्यादा होता है और इसी दौरान अगले दौर की ट्रेनिंग के लिए बेस्ट जवानों की छंटनी हो जाती है।

-अगले फेज की ट्रेनिंग स्पेशल फ्रंटियर फोर्स, इंडियन आर्मी और नैशनल सिक्यॉरिटी गार्ड्स के साथ दी जाती है। जो इस फेज में सफल होते हैं, वे अगले दौर की ट्रेनिंग में जाते हैं।

-इतनी सख्त ट्रेनिंग में सफल रहने वाले जवानों को फिर आगरा के पैराशूट ट्रेनिंग स्कूल भेजा जाता है। मार्कोस और पैरा कमांडोज की तरह गरुण कमांडो भी सीने पर पैरा बैज लगाते हैं।

-गरुड़ कमांडोज को मिजोरम में काउंटर इन्सर्जन्सी ऐंड जंगल वारफेयर स्कूल (सीआईजेडब्लूएस) में भी ट्रेनिंग दी जाती है। भारतीय सेना का यह संस्थान अपारंपरिक युद्ध में विशेषज्ञता प्रदान करने वाला प्रशिक्षण संस्थान है। इस संस्थान में न केवल गरुड़ कमांडो, बल्कि दुनियाभर की सेनाओं के सिपाही काउंटर-इन्सर्जन्सी ऑपरेशंस की ट्रेनिंग लेने आते हैं।

-ट्रेनिंग के अंतिम दौर में गरुड़ कमांडोज को भारतीय सेना के पैरा कमांडोज की सक्रिय रूप से तैनात यूनिट्स के साथ फर्स्ट हैंड ऑपरेशनल एक्सपीरियंस के लिए अटैच किया जाता है।

-गरुड़ कमांडोज दुनिया के कुछ सबसे खतरनाक हथियारों से लैस होते हैं, जिनमें साइड आर्म्स के तौर पर Tavor टीएआर -21 असॉल्ट राइफल, ग्लॉक 17 और 19 पिस्टल, क्लोज क्वॉर्टर बैटल के लिए हेक्लर ऐंड कॉच MP5 सब मशीनगन, AKM असॉल्ट राइफल, एक तरह की एके-47 और शक्तिशाली कोल्ट एम-4 कार्बाइन शामिल हैं।

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