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तीन तलाक पर संसद में ड्राफ्ट लाएगी मोदी सरकार, तीन साल की सजा का प्रावधान

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यूपी निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद केंद्र सरकार ने संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक पर ड्राफ्ट लाने की तैयारी कर रही है. जी न्यूज को सूत्रों से हवाले से मिली खबर के मुताबिक तीन तलाक पर सरकार ने ड्राफ्ट तैयार करा लिया है. संसद के शीतकालीन सत्र में इस बिल के ड्राफ्ट को पेश करने की तैयारी है. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को तीन तलाक का बिल भेजा है और उनकी राय मांगी है. सूत्रों का कहना है कि बिल में एक बार में तीन तलाक देने वालों को तीन साल की सजा का प्रावधान रखा गया है. साथ ही इसे गैरजमानती अपराध का दर्जा दिया गया है. सूत्रों का यह भी कहना है कि यह कानून अगर संसद में पास भी हो जाता है तो इसे जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं किया जाएगा.

सूत्रों का कहना है कि सरकार ने तीन तलाक पर बिल बनाने के लिए वाराणसी की मुस्लिम महिलाओं से बातचीत की थी. मीडिया रिपोर्ट्स में मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी के हवाले से कहा जा रहा है कि तीन तलाक पर मसौदा तैयार करने के लिए मुस्लिम महिलाओं के अलावा इस्लामिक स्कॉलर, मुफ्ती और वरिष्ठ वकीलों से सलाह ली जा रही है. इसके लिए सलाहकार समिति का गठन कर उसमें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के चार वकीलों के अलावा इस्लामिक विद्वान डॉ. इरफान अहमद शम्सी और धर्म गुरु मुफ्ती सफीक अहदम को विशेष रूप से शामिल किया गया है.’

इसी साल 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बहुमत के निर्णय में मुस्लिम समाज में एक बार में तीन बार तलाक देने की प्रथा को निरस्त कर दिया था. कोर्ट ने इसे असंवैधानिक, गैरकानूनी और शून्य करार दिया था. कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि तीन तलाक कुरान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने 365 पेज के फैसले में कहा, ‘3:2 के बहुमत से दर्ज की गई अलग-अलग राय के मद्देनजर‘तलाक-ए-बिद्दत’’ तीन तलाक को निरस्त किया जाता है.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर ने तीन तलाक की इस प्रथा पर छह महीने की रोक लगाने की हिमायत करते हुए सरकार से कहा कि वह इस संबंध में कानून बनाए जबकि न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस प्रथा को संविधान का उल्लंघन करने वाला करार दिया. बहुमत के फैसले में कहा गया कि तीन तलाक सहित कोई भी प्रथा जो कुरान के सिद्धांतों के खिलाफ है, अस्वीकार्य है.

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